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mahabharat 7.75.28-29: पार्थ! धनुष, बाण, पराक्रम, प्राण और मनोबल के ये छः पूर्वनिर्धारित स्वामी अत्यंत असह्य माने गए हैं। इन छः महारथियों को जीते बिना जयद्रथ को पाना असंभव है। 28-29॥   |   mahabharat अध्याय 7.75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  7.75.28-29 
धनुष्यस्त्रे च वीर्ये च प्राणे चैव तथौरसे॥ २८॥
अविषह्यतमा ह्येते निश्चिता: पार्थ षड् रथा:।
एतानजित्वा षड् रथान् नैव प्राप्यो जयद्रथ:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! धनुष, बाण, पराक्रम, प्राण और मनोबल के ये छः पूर्वनिर्धारित स्वामी अत्यंत असह्य माने गए हैं। इन छः महारथियों को जीते बिना जयद्रथ को पाना असंभव है। 28-29॥
 
Parth! These six previously determined masters of bow, arrow, bravery, vitality and morale are considered extremely unbearable. It is impossible to attain Jayadratha without conquering these six great warriors. 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)