श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.75.2 
भ्रातॄणां मतमज्ञाय त्वया वाचा प्रतिश्रुतम्।
सैन्धवं चास्मि हन्तेति तत्साहसमिदं कृतम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! तुमने अपने भाइयों की राय लिए बिना ही सिंधुराज जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा करके बड़ा दुस्साहस किया है॥ 2॥
 
Dhananjaya! You have committed a daring act by vowing to kill Sindhuraj Jayadratha without seeking the opinion of your brothers.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)