श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.75.18 
तमार्तमभिसंप्रेक्ष्य राजा किल स सैन्धव:।
मृदु चात्महितं चैव साक्षेपमिदमुक्तवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन को व्याकुल देखकर सिन्धुराज जयद्रथ ने अपने हित के लिए व्यंग्यपूर्वक तथा कोमल वाणी में इस प्रकार कहा -॥18॥
 
Seeing Duryodhana upset, King of Sindhus Jayadratha spoke sarcastically and in a soft voice for his own benefit as follows -॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)