श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका अर्जुनको कौरवोंके जयद्रथकी रक्षाविषयक उद्योगका समाचार बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.75.10 
ततो विमनस: सर्वे त्रस्ता: क्षुद्रमृगा इव।
आसन् सुयोधनामात्या: स च राजा जयद्रथ:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब दुर्योधन के मन्त्री और स्वयं राजा जयद्रथ - वे सब के सब (सिंह से भयभीत होकर) छोटे-छोटे मृगों के समान भयभीत और दुःखी हो गए॥10॥
 
‘Then Duryodhana's ministers and King Jayadratha himself - all of them became frightened and sad like small deer (frightened by a lion).॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)