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mahabharat 7.74.30: रणभूमि में मृत्युरूप उस परम सौभाग्य को प्राप्त करके, जो मंदबुद्धि मनुष्यों के लिए दुर्लभ है, तुम अपनी बाहुओं के बल से जीतकर परम श्रेष्ठ दिव्य लोकों को प्राप्त होगे॥30॥   |   mahabharat अध्याय 7.74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.74.30 
दुर्लभं मानुषैर्मन्दैर्महाभाग्यमवाप्य तु।
भुजवीर्यार्जिताँल्लोकान् दिव्यान् प्राप्स्यस्यनुत्तमान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में मृत्युरूप उस परम सौभाग्य को प्राप्त करके, जो मंदबुद्धि मनुष्यों के लिए दुर्लभ है, तुम अपनी बाहुओं के बल से जीतकर परम श्रेष्ठ दिव्य लोकों को प्राप्त होगे॥30॥
 
After attaining that supreme good fortune in the form of death in the battlefield, which is rare for slow-witted people, you will reach the most elevated divine worlds by winning with the power of your arms. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)