श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.74.25 
द्रोण उवाच
सममाचार्यकं तात तव चैवार्जुनस्य च।
योगाद् दु:खोषितत्वाच्च तस्मात्त्वतोऽधिकोऽर्जुन:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले- तात! यद्यपि मैंने आपकी और अर्जुन की समान सेवा की है, तथापि समस्त दिव्यास्त्रों की प्राप्ति और अभ्यास तथा कष्टों की दृष्टि से अर्जुन आपसे श्रेष्ठ हो गया है॥25॥
 
Dronacharya said- Tat! Although I have served you and Arjun equally, yet Arjun has become superior to you in terms of attainment and practice of all the divine weapons and sufferings. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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