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mahabharat 7.74.11: देवता, गन्धर्व, दानव, नाग और राक्षस भी उस प्रतिज्ञा को नहीं तोड़ सकते, फिर ये राजा उसे कैसे तोड़ सकते हैं?॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.74.11 
तन्न देवा न गन्धर्वा नासुरोरगराक्षसा:।
उत्सहन्तेऽन्यथाकर्तुं कुत एव नराधिपा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
देवता, गन्धर्व, दानव, नाग और राक्षस भी उस प्रतिज्ञा को नहीं तोड़ सकते, फिर ये राजा उसे कैसे तोड़ सकते हैं?॥11॥
 
‘Even the gods, Gandharvas, demons, serpents and devils cannot revoke that promise. Then how can these kings be capable of breaking it?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)