vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 74: जयद्रथका भय तथा दुर्योधन और द्रोणाचार्यका उसे आश्वासन देना
»
श्लोक 11
श्लोक
7.74.11
तन्न देवा न गन्धर्वा नासुरोरगराक्षसा:।
उत्सहन्तेऽन्यथाकर्तुं कुत एव नराधिपा:॥ ११॥
अनुवाद
देवता, गन्धर्व, दानव, नाग और राक्षस भी उस प्रतिज्ञा को नहीं तोड़ सकते, फिर ये राजा उसे कैसे तोड़ सकते हैं?॥11॥
‘Even the gods, Gandharvas, demons, serpents and devils cannot revoke that promise. Then how can these kings be capable of breaking it?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×