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mahabharat 7.73.d4: भीमसेन बोले- अर्जुन! तुम्हारी प्रतिज्ञा के वचनों से तथा भगवान श्रीकृष्ण के शंख की ध्वनि से मुझे विश्वास हो गया कि यह धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन अपने बन्धुओं सहित अवश्य मारा जायेगा।   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  7.73.d4 
(भीम उवाच
प्रतिज्ञोद्भवशब्देन कृष्णशङ्खस्वनेन च।
निहतो धार्तराष्ट्रोऽय सानुबन्ध: सुयोधन:॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले- अर्जुन! तुम्हारी प्रतिज्ञा के वचनों से तथा भगवान श्रीकृष्ण के शंख की ध्वनि से मुझे विश्वास हो गया कि यह धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन अपने बन्धुओं सहित अवश्य मारा जायेगा।
 
Bhimsen said- Arjun! By the words of your promise and by the sound of Lord Krishna's conch, I became confident that this Dhritarashtra's son Duryodhana would definitely be killed along with his relatives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)