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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.73.6 
स तथा नोदितोऽस्माभि: सदश्व इव वीर्यवान्।
असह्यमपि तं भारं वोढुमेवोपचक्रमे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हमारे आदेश पर उस वीर योद्धा ने उस असहनीय बोझ को भी एक अच्छे घोड़े की तरह उठाने की कोशिश की।
 
Upon our command, that valiant warrior tried to carry even that unbearable burden like a good horse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)