Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.73.52: भगवान् श्रीकृष्ण के मुख के भीतरी भाग में वायु भर जाने के कारण अत्यन्त भयंकर ध्वनि करने वाला पाञ्चजन्य आकाश, पाताल, दिशा और लोकों सहित सम्पूर्ण जगत् को ऐसा कम्पित करने लगा, मानो प्रलयकाल आ गया हो॥52॥ | mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स पाञ्चजन्योऽच्युतवक्त्रवायुना
भृशं सुपूर्णोदरनि:सृतध्वनि:।
जगत् सपातालवियद्दिगीश्वरं
प्रकम्पयामास युगात्यये यथा॥ ५२॥
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण के मुख के भीतरी भाग में वायु भर जाने के कारण अत्यन्त भयंकर ध्वनि करने वाला पाञ्चजन्य आकाश, पाताल, दिशा और लोकों सहित सम्पूर्ण जगत् को ऐसा कम्पित करने लगा, मानो प्रलयकाल आ गया हो॥52॥
Due to filling the inner part of the mouth of Lord Shri Krishna with air, Panchjanya, which made a very terrible sound, shook the entire world including the sky, the underworld, the direction and the celestial spheres, as if the time of doomsday had arrived. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥