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mahabharat 7.73.50: यह कहकर अर्जुन ने अपने दाहिने और बाएँ दोनों हाथों से गाण्डीव धनुष को घुमाया। उसकी ध्वनि अन्य ध्वनियों को दबा कर सम्पूर्ण आकाश में गूँज उठी।   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.73.50 
एवमुक्त्वा विचिक्षेप गाण्डीवं सव्यदक्षिणम्।
तस्य शब्दमतिक्रम्य धनु:शब्दोऽस्पृशद् दिवम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर अर्जुन ने अपने दाहिने और बाएँ दोनों हाथों से गाण्डीव धनुष को घुमाया। उसकी ध्वनि अन्य ध्वनियों को दबा कर सम्पूर्ण आकाश में गूँज उठी।
 
Saying this, Arjuna twirled the Gandiva bow with his right and left hands as well. Its sound drowned out the other sounds and echoed in the entire sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)