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mahabharat 7.73.46-47: अब आप लोग मेरी दूसरी प्रतिज्ञा सुनिए। यदि इस पापी जयद्रथ के मारे जाने से पहले सूर्य अस्त हो जाए, तो मैं यहाँ जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर जाऊँगा ॥46-47॥   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  7.73.46-47 
इमां चाप्यपरां भूय: प्रतिज्ञां मे निबोधत॥ ४६॥
यद्यस्मिन्नहते पापे सूर्योऽस्तमुपयास्यति।
इहैव सम्प्रवेष्टाहं ज्वलितं जातवेदसम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अब आप लोग मेरी दूसरी प्रतिज्ञा सुनिए। यदि इस पापी जयद्रथ के मारे जाने से पहले सूर्य अस्त हो जाए, तो मैं यहाँ जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर जाऊँगा ॥46-47॥
 
Now you all please listen to my second vow. If the Sun sets before this sinner Jayadratha is killed, I will enter the fire burning here. ॥ 46-47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)