Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.73.4: हम लोग द्रोणाचार्य से पीड़ित होने के कारण उनकी सेना की व्यूहरचना को देख भी नहीं सकते थे; फिर रणभूमि में उसे कैसे भेद सकते थे?॥4॥ | mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते पीड्यमाना द्रोणेन द्रोणानीकं न शक्नुम:।
प्रतिवीक्षितुमप्याजौ भेत्तुं तत् कुत एव तु॥ ४॥
अनुवाद
हम लोग द्रोणाचार्य से पीड़ित होने के कारण उनकी सेना की व्यूहरचना को देख भी नहीं सकते थे; फिर रणभूमि में उसे कैसे भेद सकते थे?॥4॥
Because we were suffering from Dronacharya, we could not even look at their army formation; then how could we have broken through it on the battlefield?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥