श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.73.38-39h 
भुञ्जानानां तु सव्येन उत्सङ्गे चापि खादताम्।
पालाशमासनं चैव तिन्दुकैर्दन्तधावनम्॥ ३८॥
ये चावर्जयतां लोका: स्वपतां च तथोषसि।
 
 
अनुवाद
जो लोग बाएँ हाथ से खाते हैं, जो अन्न को गोद में रखकर खाते हैं, जो पलाश के आसन और तेंदू की दातुन का त्याग नहीं करते तथा जो प्रातःकाल सोते हैं, वे नरक को प्राप्त होते हैं (यदि मैं जयद्रथ को न मारूँ तो मुझे भी वही नरक मिलेगा)। ॥38 1/2॥
 
Those who eat with their left hand, who eat while keeping their food in their lap, who do not abandon the Palasa seat and the Tendu tooth brush, and who sleep during the early morning, they get the hell (I too will get the same, if I do not kill Jayadratha). ॥ 38 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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