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mahabharat 7.73.3: जब आचार्य को सारथिओं ने रोक लिया और मैं पूर्णतः सुरक्षित हो गया, तब उन्होंने बड़े वेग से हम पर आक्रमण किया और अपने तीखे बाणों से हमें घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.73.3 
स वार्यमाणो रथिभिर्मयि चापि सुरक्षिते।
अस्मानभिजगामाशु पीडयन् निशितै: शरै:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब आचार्य को सारथिओं ने रोक लिया और मैं पूर्णतः सुरक्षित हो गया, तब उन्होंने बड़े वेग से हम पर आक्रमण किया और अपने तीखे बाणों से हमें घायल कर दिया।
 
When the Acharya was stopped by the charioteers and I was completely safe, then he attacked us with great speed, hurting us with his sharp arrows. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)