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mahabharat 7.73.16-17h: धर्मराज युधिष्ठिर के ये वचन सुनकर अर्जुन ने दुःखी होकर गहरी साँस ली और 'हे पुत्र' कहते हुए भूमि पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.73.16-17h 
ततोऽर्जुनो वच: श्रुत्वा धर्मराजेन भाषितम्॥ १६॥
हा पुत्र इति नि:श्वस्य व्यथितो न्यपतद् भुवि।
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर के ये वचन सुनकर अर्जुन ने दुःखी होकर गहरी साँस ली और 'हे पुत्र' कहते हुए भूमि पर गिर पड़े।
 
Upon hearing these words of Dharmaraja Yudhishthira, Arjuna, pained, took a deep breath and fell on the ground saying, 'Oh son'. 16 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)