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mahabharat 7.73.12: तत्पश्चात् दुःशासन के पुत्र ने, जो अभिमन्यु के प्रहार से अत्यन्त भयभीत था, पूर्वोक्त महारथियों द्वारा रथहीन कर दिए गए अभिमन्यु को (अपनी गदा के प्रहार से) शीघ्रतापूर्वक मार डाला॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.73.12 
ततो दौ:शासनि: क्षिप्रं तथा तैर्विरथीकृतम्।
संशयं परमं प्राप्य दिष्टान्तेनाभ्ययोजयत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दुःशासन के पुत्र ने, जो अभिमन्यु के प्रहार से अत्यन्त भयभीत था, पूर्वोक्त महारथियों द्वारा रथहीन कर दिए गए अभिमन्यु को (अपनी गदा के प्रहार से) शीघ्रतापूर्वक मार डाला॥12॥
 
Thereafter, Dushasan's son, who was in great danger from the blow of Abhimanyu, quickly killed (with the blow of his mace) Abhimanyu, who had been made chariotless by the aforesaid charioteers. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)