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mahabharat 7.72.88: तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने मन ही मन पुत्र के वियोग से अत्यन्त दुःखी हुए कुपित कमलनेत्र अर्जुन से कहा - 88॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  7.72.88 
ततस्तं पुत्रशोकेन भृशं पीडितमानसम्।
राजीवलोचनं क्रुद्धं राजा वचनमब्रवीत्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने मन ही मन पुत्र के वियोग से अत्यन्त दुःखी हुए कुपित कमलनेत्र अर्जुन से कहा - 88॥
 
Thereafter, in his heart, King Yudhishthira said to the angry lotus-eyed Arjuna, who was greatly distressed by the loss of his son: 88॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि अर्जुनकोपे द्विसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें अर्जुनकोपविषयक बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ९१ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)