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mahabharat 7.72.87: श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर अर्जुन के शुभचिंतक थे और हर परिस्थिति में उसकी इच्छा का पालन करते थे; क्योंकि उनके मन में अर्जुन के प्रति अगाध आदर और प्रेम था। अतः उस समय उससे कुछ कहने का अधिकार केवल उन्हें ही था।   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  7.72.87 
सर्वास्ववस्थासु हितावर्जुनस्य मनोनुगौ।
बहुमानात् प्रियत्वाच्च तावेनं वक्तुमर्हत:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर अर्जुन के शुभचिंतक थे और हर परिस्थिति में उसकी इच्छा का पालन करते थे; क्योंकि उनके मन में अर्जुन के प्रति अगाध आदर और प्रेम था। अतः उस समय उससे कुछ कहने का अधिकार केवल उन्हें ही था।
 
Sri Krishna and Yudhishthira were Arjun's well wishers and followed his wishes in all circumstances; because they had great respect and love for Arjun. Hence, only they had the right to say something to him at that time. 87.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)