श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  7.72.84 
एवमुक्त्वा ततो वाक्यं तिष्ठंश्चापवरासिमान्।
न स्माशक्यत बीभत्सु: केनचित्प्रसमीक्षितुम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर अर्जुन धनुष और उत्तम तलवार लेकर उठ खड़ा हुआ। उस समय कोई भी उसकी ओर देख भी नहीं सकता था।
 
Having said this, Arjuna stood up with his bow and his best sword. At that time no one could even look at him. 84
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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