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mahabharat 7.72.82: मैं तो अपनी ही निन्दा करूँगा, क्योंकि यह जानते हुए भी कि तुम सब लोग अत्यन्त दुर्बल, डरपोक और संकल्पहीन हो, मैं अन्यत्र चला गया (अभिमन्यु को तुम्हारे अधीन छोड़कर)॥82॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  7.72.82 
आत्मानमेव गर्हेयं यदहं वै सुदुर्बलान्।
युष्मानाज्ञाय निर्यातो भीरूनकृतनिश्चयान्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
मैं तो अपनी ही निन्दा करूँगा, क्योंकि यह जानते हुए भी कि तुम सब लोग अत्यन्त दुर्बल, डरपोक और संकल्पहीन हो, मैं अन्यत्र चला गया (अभिमन्यु को तुम्हारे अधीन छोड़कर)॥82॥
 
I will only condemn myself because, despite knowing that you all are very weak, timid and lacking in resolve, I went elsewhere (leaving Abhimanyu in your care).॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)