श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.72.8 
संजय उवाच
तत: संध्यामुपास्यैव वीरौ वीरावसादने।
कथयन्तौ रणे वृत्तं प्रयातौ रथमास्थितौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् दोनों वीर योद्धा योद्धाओं से भरी हुई उस रणभूमि में संध्यावंदन करके अपने रथों पर बैठकर युद्ध के विषय में बातें करते हुए आगे बढ़े।
 
Sanjaya says - O King! Thereafter both the brave warriors, after offering evening prayers in that battlefield full of warriors, sat on their chariots and proceeded forward talking about the war.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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