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mahabharat 7.72.77: ‘कल तुम देखोगे कि मेरे पुत्र के शत्रुओं को मैंने युद्ध में उनके हाथियों, रथों, घोड़ों और सम्बन्धियों सहित मार डाला है।   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  7.72.77 
सनागस्यन्दनहयान् द्रक्ष्यध्वं निहतान् मया।
संग्रामे सानुबन्धांस्तान् मम पुत्रस्य वैरिण:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
‘कल तुम देखोगे कि मेरे पुत्र के शत्रुओं को मैंने युद्ध में उनके हाथियों, रथों, घोड़ों और सम्बन्धियों सहित मार डाला है।
 
‘Tomorrow you will see that my son's enemies have been killed by me in the war along with their elephants, chariots, horses and relatives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)