| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध » श्लोक 70 |
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| | | | श्लोक 7.72.70  | एतच्च सर्ववीराणां काङ्क्षितं भरतर्षभ।
संग्रामेऽभिमुखो मृत्युं प्राप्नुयादिति मानद॥ ७०॥ | | | | | | अनुवाद | | हे भारतश्रेष्ठ, दूसरों का आदर करने वाले! वीर पुरुष युद्ध में आमने-सामने लड़ता हुआ ही मरे, यही समस्त वीरों की अभीष्ट कामना है ॥70॥ | | | | ‘Bharat Shrestha, one who respects others! A brave man should die while fighting face to face in battle, this is the desired wish of all the brave men. 70॥ | | ✨ ai-generated | | |
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