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श्लोक 7.72.64-65h  |
किमर्थमेतन्नाख्यातं त्वया कृष्ण रणे मम॥ ६४॥
अधाक्षं तानहं क्रूरांस्तदा सर्वान् महारथान्। |
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| अनुवाद |
| ‘श्रीकृष्ण! आपने मुझे युद्धभूमि में ही यह बात क्यों नहीं बताई? मैं तो उसी समय उन सभी क्रूर योद्धाओं को जलाकर भस्म कर देता।’ |
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| ‘Sri Krishna! Why did you not tell me this in the battle field itself? I would have burnt all those cruel warriors to ashes at that time itself.’ |
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