श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  7.72.57-58h 
सुभद्रा वक्ष्यते किं मामभिमन्युमपश्यती॥ ५७॥
द्रौपदी चैव दु:खार्ते ते च वक्ष्यामि किं न्वहम्।
 
 
अनुवाद
जब सुभद्रा अभिमन्यु को न देखेगी, तब वह मुझसे क्या कहेगी? द्रौपदी मुझसे कैसे बात करेगी? मैं इन दोनों व्यथित स्त्रियों को क्या उत्तर दूँगा?॥57 1/2॥
 
‘What will Subhadra say to me when she does not see Abhimanyu? How will Draupadi talk to me? What answer will I give to these two distressed ladies?॥ 57 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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