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सुभद्रामनुशोचामि या पुत्रमपलायिनम्॥ ५६॥
रणे विनिहतं श्रुत्वा शोकार्ता वै विनङ्क्ष्यति।
अनुवाद
मैं सुभद्रा के लिए बार-बार शोक कर रहा हूँ, जो यह सुनकर शोक में अपने प्राण त्याग देगी कि उसका वीर पुत्र, जो युद्ध से कभी विमुख नहीं हुआ, युद्धभूमि में मारा गया है।
‘I am repeatedly grieving for Subhadra, who will give up her life in grief on hearing that her valiant son, who never turned away from war, has been killed on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥