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mahabharat 7.72.5: मेरे हृदय में विपत्ति का भय समा गया है और वह मुझे किसी भी प्रकार से नहीं छोड़ता। पृथ्वी और समस्त दिशाओं में हो रही भयंकर विपत्तियाँ मुझे भयभीत कर रही हैं।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.72.5 
अनिष्टं चैव मे श्लिष्टं हृदयान्नापसर्पति।
भुवि ये दिक्षु चात्युग्रा उत्पातास्त्रासयन्ति माम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मेरे हृदय में विपत्ति का भय समा गया है और वह मुझे किसी भी प्रकार से नहीं छोड़ता। पृथ्वी और समस्त दिशाओं में हो रही भयंकर विपत्तियाँ मुझे भयभीत कर रही हैं।॥5॥
 
‘The fear of misfortune has entered my heart and it does not leave me in any way. The terrible calamities happening on the earth and in all directions are frightening me. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)