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mahabharat 7.72.45-46h: निश्चय ही आज वैवस्वत यम, वरुण, इन्द्र और कुबेर तुम्हारे जैसे निर्भय योद्धा को अपना प्रिय अतिथि बनाकर तुम्हारा बड़े आदर-सत्कार के साथ सत्कार करेंगे।’ ॥45 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.72.45-46h 
नूनं वैवस्वतश्च त्वां वरुणश्च प्रियातिथिम्॥ ४५॥
शतक्रतुर्धनेशश्च प्राप्तमर्चन्त्यभीरुकम्।
 
 
अनुवाद
निश्चय ही आज वैवस्वत यम, वरुण, इन्द्र और कुबेर तुम्हारे जैसे निर्भय योद्धा को अपना प्रिय अतिथि बनाकर तुम्हारा बड़े आदर-सत्कार के साथ सत्कार करेंगे।’ ॥45 1/2॥
 
Surely today Vaivasvat Yama, Varuna, Indra and Kubera would be treating you with great respect having a fearless warrior like you as their dear guest.' ॥ 45 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)