Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.72.44-45h: निश्चय ही वह संयमनी नगरी सदा ही पुण्यात्माओं की शरणस्थली है; जो आज अपनी ही प्रभा से प्रकाशित और मनोहर होकर आपके कारण अत्यंत तेजस्वी हो गयी होगी। | mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा च संयमनी नूनं सदा सुकृतिनां गति:॥ ४४॥
स्वभाभिर्भासिता रम्या त्वयात्यर्थं विराजते।
अनुवाद
निश्चय ही वह संयमनी नगरी सदा ही पुण्यात्माओं की शरणस्थली है; जो आज अपनी ही प्रभा से प्रकाशित और मनोहर होकर आपके कारण अत्यंत तेजस्वी हो गयी होगी।
Surely that Sanyamani city is always the refuge of the virtuous; which today, being illuminated and charming by its own radiance, must have become extremely radiant because of you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥