| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 7.72.4  | किं नु मे हृदयं त्रस्तं वाक् च सज्जति केशव।
स्पन्दन्ति चाप्यनिष्टानि गात्रं सीदति चाप्युत॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | केशव! आज न जाने क्यों मेरा हृदय धड़क रहा है, वाणी लड़खड़ा रही है, बाएँ अंग अशुभ भाव से फड़क रहे हैं और शरीर दुर्बल हो रहा है। | | | | Keshav! I don't know why my heart is pounding today, my speech is faltering, my left limbs are twitching in an ominous manner and my body is becoming weak. | | ✨ ai-generated | | |
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