श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.72.38-39h 
अभिवादनदक्षं तं पितॄणां वचने रतम्॥ ३८॥
नाद्याहं यदि पश्यामि का शान्तिर्हृदयस्य मे।
 
 
अनुवाद
‘यदि मैं आज अभिमन्यु को न देखूँ, जो झुकने में कुशल है और अपने पूर्वजों की आज्ञा का पालन करने में तत्पर है, तो मेरे हृदय को शांति कैसे मिलेगी?॥38 1/2॥
 
‘How will my heart find peace if I do not see Abhimanyu today, who is skilled in bowing down and is ready to obey the orders of his ancestors?॥ 38 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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