Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.72.37-38h: उसकी सुन्दरता अतुलनीय थी। ऐसी सुन्दरता देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। यदि मैं वीर अभिमन्यु की उस सुन्दरता को न देख सकूँ, तो मेरे हृदय को शांति कैसे मिलेगी?॥37 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रूपं चाप्रतिमं तस्य त्रिदशैश्चापि दुर्लभम्॥ ३७॥
अपश्यतो हि वीरस्य का शान्तिर्हृदयस्य मे।
अनुवाद
उसकी सुन्दरता अतुलनीय थी। ऐसी सुन्दरता देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। यदि मैं वीर अभिमन्यु की उस सुन्दरता को न देख सकूँ, तो मेरे हृदय को शांति कैसे मिलेगी?॥37 1/2॥
His beauty was incomparable. Such beauty is rare even for the gods. If I cannot see that beauty of brave Abhimanyu, how will my heart get peace?॥ 37 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥