Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.72.36-37h: अभिमन्यु की वाणी मधुर, मनमोहक, वीणा के समान तथा कोयल की वाणी के समान मधुर थी। यदि मैं उसे न सुनूँ तो मेरे हृदय को शांति कैसे मिलेगी?॥36 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तन्त्रीस्वनसुखं रम्यं पुंस्कोकिलसमध्वनिम्॥ ३६॥
अशृण्वत: स्वनं तस्य का शान्तिर्हृदयस्य मे।
अनुवाद
अभिमन्यु की वाणी मधुर, मनमोहक, वीणा के समान तथा कोयल की वाणी के समान मधुर थी। यदि मैं उसे न सुनूँ तो मेरे हृदय को शांति कैसे मिलेगी?॥36 1/2॥
Abhimanyu's voice was pleasant, charming, like the sound of a Veena and as sweet as the cuckoo's call. How would my heart find peace if I did not hear it?॥ 36 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥