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mahabharat 7.72.27: यदि मैं सुभद्रा के प्रिय वीर पुत्र को, जिसे मैंने सदैव प्रेम और लाड़-प्यार किया है, न देखूँ, तो मैं भी यमलोक को जाऊँगा॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.72.27 
वार्ष्णेयीदयितं शूरं मया सततलालितम्।
यदि पुत्रं न पश्यामि यास्यामि यमसादनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं सुभद्रा के प्रिय वीर पुत्र को, जिसे मैंने सदैव प्रेम और लाड़-प्यार किया है, न देखूँ, तो मैं भी यमलोक को जाऊँगा॥ 27॥
 
If I do not see the beloved valiant son of Subhadra, whom I have always loved and pampered, then I too shall go to Yamaloka.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)