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श्लोक 7.72.19  |
मुखवर्णोऽप्रसन्नो व: सर्वेषामेव लक्ष्यते।
न चाभिमन्युं पश्यामि न च मां प्रतिनन्दथ॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| आज तुम सबके चेहरों की चमक दुःखी लग रही है, मैं अभिमन्यु को देख नहीं पा रहा हूँ और तुम भी मुझसे प्रसन्नतापूर्वक बात नहीं कर रहे हो॥19॥ |
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| Today the glow on the faces of all of you looks unhappy, I am not able to see Abhimanyu and you too are not talking to me happily.॥ 19॥ |
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