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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.72.17 
संजय उवाच
एवं संकथयन्तौ तौ प्रविष्टौ शिबिरं स्वकम्।
ददृशाते भृशास्वस्थान् पाण्डवान् नष्टचेतस:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा: हे राजन! इस प्रकार बातें करते हुए वे दोनों शिविर में पहुँचे और देखा कि पाण्डव अत्यन्त दुःखी और निराश हैं।
 
Sanjaya said: O King! Talking in this manner, the two reached the camp and saw that the Pandavas were extremely distressed and discouraged.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)