| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध » श्लोक 15-16h |
|
| | | | श्लोक 7.72.15-16h  | न हि शुद्ध्यति मे भावो दृष्ट्वा स्वजनमाकुलम्।
अपि पाञ्चालराजस्य विराटस्य च मानद॥ १५॥
सर्वेषां चैव योधानां सामग्रॺं स्यान्ममाच्युत। | | | | | | अनुवाद | | आज इन स्वजनों को संकट में देखकर मेरे हृदय का भय दूर नहीं हो रहा है। हे दूसरों को सम्मान देने वाले अच्युत श्रीकृष्ण! क्या राजा द्रुपद, विराट और मेरे अन्य सभी योद्धा सुरक्षित रहेंगे?॥15 1/2॥ | | | | ‘Today, seeing these relatives in distress, the fear in my heart is not relieved. Achyuta Shri Krishna, who gives respect to others! Will King Drupada, Virat and all my other warriors be safe?॥ 15 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|