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mahabharat 7.72.13-14: मेरे सैनिक मुझे देखकर मुँह लटकाए लौट रहे हैं। वे पहले की तरह मेरा अभिवादन नहीं कर रहे हैं और युद्ध का समाचार नहीं सुना रहे हैं। माधव! क्या आज मेरे भाई सुरक्षित रहेंगे?॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  7.72.13-14 
योधाश्चापि हि मां दृष्ट्वा निवर्तन्ते ह्यधोमुखा:॥ १३॥
कर्माणि च यथापूर्वं कृत्वा नाभिवदन्ति माम्।
अपि स्वस्ति भवेदद्य भ्रातृभ्यो मम माधव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मेरे सैनिक मुझे देखकर मुँह लटकाए लौट रहे हैं। वे पहले की तरह मेरा अभिवादन नहीं कर रहे हैं और युद्ध का समाचार नहीं सुना रहे हैं। माधव! क्या आज मेरे भाई सुरक्षित रहेंगे?॥13-14॥
 
‘My soldiers return with their faces downcast upon seeing me. They are not greeting me as before and telling me the news of the war. Madhava! Will my brothers be safe today?’॥ 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)