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mahabharat 7.71.9: व्यासजी कहते हैं- युधिष्ठिर! नारदजी के ऐसा कहते ही अद्भुत और तेजस्वी संजयपुत्र वहाँ प्रकट हुए। ऋषि ने प्रसन्न होकर उन्हें राजा को दे दिया था। वे कुबेरपुत्र के समान प्रतीत होते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.71.9 
व्यास उवाच
प्रादुरासीत् तत: पुत्र: सृञ्जयस्याद्भुतप्रभ:।
प्रसन्नेनर्षिणा दत्त: कुबेरतनयोपम:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं- युधिष्ठिर! नारदजी के ऐसा कहते ही अद्भुत और तेजस्वी संजयपुत्र वहाँ प्रकट हुए। ऋषि ने प्रसन्न होकर उन्हें राजा को दे दिया था। वे कुबेरपुत्र के समान प्रतीत होते थे।
 
Vyasji says- Yudhishthira! As soon as Naradji said this, the wonderful and radiant son of Sanjaya appeared there. The sage had given him to the king in pleasure. He looked like the son of Kubera.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)