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mahabharat 7.71.21: राजन! यह जानकर युद्ध के लिए उठो। अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखो और शोक मत करो। तुमने मृत्यु की उत्पत्ति और उसकी अद्वितीय तपस्या की कथा सुन ली है। 21॥   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.71.21 
एवं विद्वान‍् समुत्तिष्ठ प्रयतो भव मा शुच:।
श्रुतस्ते सम्भवो मृत्योस्तपांस्यनुपमानि च॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! यह जानकर युद्ध के लिए उठो। अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखो और शोक मत करो। तुमने मृत्यु की उत्पत्ति और उसकी अद्वितीय तपस्या की कथा सुन ली है। 21॥
 
Rajan! Knowing this, get up for war. Keep your mind and senses under control and do not mourn. You have heard the story of the origin of death and its unique penance. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)