Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.71.19-20h: महाराज! शोक से दुःख ही बढ़ता है। अतः विद्वान पुरुष को चाहिए कि शोक का त्याग करके केवल अपने कल्याण के लिए ही प्रयत्न करे तथा महान् आनन्द, महान् सम्मान और सुख की प्राप्ति का चिन्तन करे। 19 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शोचतो हि महाराज अघमेवाभिवर्धते।
तस्माच्छोकं परित्यज्य श्रेयसे प्रयतेद् बुध:॥ १९॥
प्रहर्षमभिमानं च सुखप्राप्तिं च चिन्तयन्।
अनुवाद
महाराज! शोक से दुःख ही बढ़ता है। अतः विद्वान पुरुष को चाहिए कि शोक का त्याग करके केवल अपने कल्याण के लिए ही प्रयत्न करे तथा महान् आनन्द, महान् सम्मान और सुख की प्राप्ति का चिन्तन करे। 19 1/2॥
Maharaj! Mourning only increases sorrow. Therefore, a learned man should give up grief and strive only for his own welfare while thinking about attaining great joy, great respect and happiness. 19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥