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श्लोक 7.71.15  |
तस्मात् स्वर्गगतं पुत्रमर्जुनस्य हतं रणे।
न चेहानयितुं शक्यं किंचिदप्राप्यमीहितम्॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| अर्जुन का पुत्र युद्ध में मारा गया है, इसलिए स्वर्ग चला गया है। अतः उसे यहाँ नहीं लाया जा सकता। कोई भी अप्राप्य वस्तु केवल कामना करने से प्राप्त नहीं होती॥ 15॥ |
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| Arjun's son has gone to heaven because he was killed in the war. Therefore, he cannot be brought here. Any unobtainable thing cannot be attained merely by wishing for it.॥ 15॥ |
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