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mahabharat 7.71.14: विद्वान् पुरुष सदैव पुण्यकर्मों द्वारा स्वर्ग जाने की इच्छा रखते हैं; परन्तु स्वर्ग में रहने वाले मनुष्य स्वर्ग से इस संसार में आने की इच्छा नहीं रखते ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.71.14 
विद्वांस: कर्मभि: पुण्यै: स्वर्गमीहन्ति नित्यश:।
न तु स्वर्गादयं लोक: काम्यते स्वर्गवासिभि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
विद्वान् पुरुष सदैव पुण्यकर्मों द्वारा स्वर्ग जाने की इच्छा रखते हैं; परन्तु स्वर्ग में रहने वाले मनुष्य स्वर्ग से इस संसार में आने की इच्छा नहीं रखते ॥14॥
 
Learned men always desire to go to heaven through virtuous deeds; But the people living in heaven do not wish to come to this world from heaven. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)