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mahabharat 7.71.13: आपका पुत्र अभिमन्यु भी ब्रह्मचर्य, सद्ज्ञान, वेदों का स्वाध्याय और यज्ञों का पालन करके जिन-जिन लोकों में पुण्यात्मा जाते हैं, वहाँ-वहाँ गया है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.71.13 
ब्रह्मचर्येण यान् कांश्चित् प्रज्ञया च श्रुतेन च।
इष्टैश्च क्रतुभिर्यान्ति तांस्ते पुत्रोऽक्षयान् गत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आपका पुत्र अभिमन्यु भी ब्रह्मचर्य, सद्ज्ञान, वेदों का स्वाध्याय और यज्ञों का पालन करके जिन-जिन लोकों में पुण्यात्मा जाते हैं, वहाँ-वहाँ गया है॥13॥
 
Your son Abhimanyu has also gone to whatever worlds virtuous souls go to by following celibacy, good knowledge, self-study of the Vedas and performing yagyas. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)