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mahabharat 7.71.10: राजा सृंजय अपने पुत्र से मिलकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उत्तम हविओं सहित पुण्यमय यज्ञों द्वारा भगवान की पूजा की। 10॥   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.71.10 
तत: संगम्य पुत्रेण प्रीतिमानभवन्नृप:।
ईजे च क्रतुभि: पुण्यै: समाप्तवरदक्षिणै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा सृंजय अपने पुत्र से मिलकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उत्तम हविओं सहित पुण्यमय यज्ञों द्वारा भगवान की पूजा की। 10॥
 
King Srinjay was very happy to meet his son. He worshiped the Lord through virtuous sacrifices with excellent offerings. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)