श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 70: परशुरामजीका चरित्र  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.70.25 
एते चतुर्भद्रतरास्त्वया भद्रशताधिका:।
मृता नरवरश्रेष्ठ मरिष्यन्ति च सृञ्जय॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ संजय! अब तक जिन लोगों का वर्णन किया गया है, वे न केवल चार प्रकार के शुभ गुणों में तुमसे श्रेष्ठ थे, अपितु उनमें तुमसे सैकड़ों अधिक शुभ गुण भी थे; तथापि वे मर गए और जो जीवित हैं, वे भी मरेंगे॥25॥
 
O best of men, Sanjaya! The people described so far were not only superior to you in the four types of auspicious qualities, but they also had hundreds more auspicious qualities than you; however, they died and those who are alive will also die. ॥25॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें षोडशराजकीयोपाख्यानविषयक सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७०॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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