Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.70.24-25h: सृंजय! चारों गुणों में वह आपसे श्रेष्ठ है और आपके पुत्र से भी अधिक गुणवान है। अतः आप अपने उस पुत्र के लिए शोक न करें जो यज्ञ और दान से रहित है। 24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.70: परशुरामजीका चरित्र । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वया चतुर्भद्रतर: पुत्रात् पुण्यतरस्तव॥ २४॥
अयज्वानमदाक्षिण्यं मा पुत्रमनुतप्यथा:।
अनुवाद
सृंजय! चारों गुणों में वह आपसे श्रेष्ठ है और आपके पुत्र से भी अधिक गुणवान है। अतः आप अपने उस पुत्र के लिए शोक न करें जो यज्ञ और दान से रहित है। 24 1/2॥
Srinjay! In all the four beneficial qualities, he is superior to you and more virtuous than your son. Therefore, do not mourn for your son who is devoid of sacrificial offerings and donations. 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥