श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 70: परशुरामजीका चरित्र  »  श्लोक 11-13
 
 
श्लोक  7.70.11-13 
तत: काश्मीरदरदान् कुन्तिक्षुद्रकमालवान्॥ ११॥
अङ्गवङ्गकलिङ्गांश्च विदेहांस्ताम्रलिप्तकान्।
रक्षोवाहान् वीतिहोत्रांस्त्रिगर्तान् मार्तिकावतान्॥ १२॥
शिबीनन्यांश्च राजन्यान् देशान् देशान् सहस्रश:।
निजघान शितैर्बाणैर्जामदग्न्य: प्रतापवान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद महाबली परशुराम ने अपने तीखे बाणों से कश्मीर, दरद, कुंती, क्षुद्रक, मालव, अंग, वंग, कलिंग, विदेह, ताम्रलिप्त, रक्षवाह, वितिहोत्र, त्रिगर्त, मार्तिकावत, शिबि और हजारों अन्य देशों के क्षत्रियों को मार डाला।
 
Thereafter the mighty Parasurama killed the Kshatriyas of Kashmir, Dard, Kunti, Kshudraka, Malava, Ang, Vanga, Kalinga, Videha, Tamralipta, Rakshavaha, Vitihotra, Trigarta, Martikavat, Shibi and thousands of other countries with his sharp arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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