श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 70: परशुरामजीका चरित्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.70.1 
नारद उवाच
रामो महातपा: शूरो वीरलोकनमस्कृत:।
जामदग्न्योऽप्यतियशा अवितृप्तो मरिष्यति॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं- सृंजय! महान तपस्वी, वीर, पराक्रमी, जमदग्निनन्दन परशुरामजी भी अतृप्त अवस्था में ही मरेंगे॥1॥
 
Naradji says- Srinjay! The great ascetic, the brave man, the great man of valor, Jamadagninandan Parshuramji will also die in an unsatisfied state. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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